2 अक्टूबरः गांधी जयंती, शास्त्री जयंती

आज गांधी जयंती है । तमाम देशवासियों ने आज बापू को याद किया होगा । सार्वजनिक अवकाश होने के कारण किसी कार्यालय में किसी प्रकार का समारोह आयोजित हुआ होगा यह मैं नहीं समझता । सार्वजनिक स्थलों पर विविध आयोजन हुए ही होंगे, और संबंधित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने अपने विचार पूरे जोर से श्रोताओं के सामने रखे होंगे, अथवा बापू के प्रति अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि प्रस्तुत की होगी ।

विदेशों में भी इस दिन को महत्त्व मिल चुका है और इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा-दिवस के तौर पर मान्यता मिली है । समाचार माध्यमों ने भी महात्मा को याद किया है और उनको केंद्र में रखते हुए अपने-अपने उद्गार पाठकों के समक्ष रखे हैं । मेरे प्रातःकालीन अखबार हिन्दुस्तान ने भी अपना फर्ज निभाते हुए इस बात पर बहुत कुछ लिखा है कि कुछ चुने हुए ख्यातिलब्ध व्यक्ति क्या सोचते हैं । ख्यातनाम सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने राज ठाकरे को संबोधित करते हुए उन्हें दूर की सोचने की सलाह दी है, तो योगाचार्य बाबा रामदेव ने सभी देशवासियों से अनुरोध किया कि वे स्वदेशी भावना अपनायें । एक ओर चर्चित सच्चर कमेटी के पूर्व-न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर देश न बांटने की गुजारिश ‘प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग’ आडवाणीजी से करते हैं, तो दूसरी ओर आरएसएस के सुदर्शनजी को समाजवादी नेता सुरेन्द्र मोहन हिंदुत्व की आत्मा पहचानने की मंत्रणा दे रहे हैं । लेखक सुधीश पचौरी द्वारा टीवी सीरियलों की निर्मात्री एकता कपूर को सलाह दी गयी है कि वे सच पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करें, और इसी प्रकार मेरे उक्त अखबार की प्रमुख संपादक मृणाल पांडे भारी-भरकम काया के मालिक राजनेता पप्पू यादव से कहती हैं कि वे उपवास करना सीखें ।

उक्त अखबार में इस अवसर पर विभिन्न संगठनों तथा संस्थाओं द्वारा भी विज्ञापनों द्वारा बापू को याद किया गया है । इन सभी बातों के बीच मेरे लिए सर्वाधिक माने रखते हैं गांधीवादी अर्थशास्त्री एल सी जैन के विचार, जो उन्होंने अपने अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री को लक्ष्य करके कहे हैं (क्लिक करें)। मेरी याददास्त के अनुसार इन जैन साहब का पूरा नाम लक्ष्मीचंद रहा है और वे काफी समय पहले योजना आयोग के सदस्य रह चुके हैं । मुझसे भूल हो सकती है । जैन साहब प्रधानमंत्री जी से आग्रह करते हैं कि वे अपनी चिंताएं केवल ‘इंडिया’ तक ही सीमित न रखें, बल्कि उसका दायरा ‘भारत’ तक बढ़ायें, जहां लोग दो वक्त के खाने तक को तरस रहे हैं । गौर करने की बात है कि जैन साहब ने ‘इंडिया’ तथा ‘भारत’ के भेद का स्पष्ट उल्लेख किया है ।

यही दिन पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शास्त्रीजी का भी जन्मदिन है । किंतु उनकी चर्चा शायद ही कहीं होती हो । मुझे अपने हिन्दी अखबार में उनका कहीं जिक्र नहीं दिखा । कहीं किसी कोने में उनका भी नाम रहा हो तो कह नहीं सकता ।

मैं अपने इस ब्लॉग की शुरुआत बीबीसी रेडियो के उस आलेख के उल्लेख से करना चाहता था जो मैंने करीब डेड़ वर्ष पहले पढ़ा था । उस लेख में इंडिया तथा भारत के अंतर की संक्षिप्त विवेचना की गयी है । मुझे ब्लॉग की कोई जल्दबाजी नहीं थी । सोचा था किसी दिन मन हो गया तो लिखना आंरभ कर दूंगा । लेकिन आज के उक्त लेख ने मेरे इरादे बदल दिये । सोचा कि क्यों न गांधी-जयंती ही को शुभमुहूर्त मान कर आज ही लिखना शुरू कर दूं ।

इंडिया एवं भारत के अंतर को मैं कैसे देखता हूं इसका खुलासा यहां नहीं करने जा रहा हूं । तत्संबंधित जो विचार मेरे मन में थे वे अभी वहीं हैं । उनका नंबर बाद में आयेगा । अभी इतना ही कहना है कि कथित अंतर वास्तविक है और गंभीर तथा चिंताप्रद है । इंडिया भारत से हटकर कर कुछ और ही है यह बात में पहले भी टेलीविजन चैनलों पर आयोजित परिचर्चाओं में कई बार सुन चुका हूं । आप ध्यान दें तो पायेंगे कि आज इस देश में भारत की बात करने वाला कोई नहीं है । सबके मुख से इंडिया और इंडिया की प्रॉग्रेस की बात निकलती है । देश इकॉनामिक सुपरपावर बनने बाला है, देश को नॉलेज पावर बनना है, आगामी दो हजार बीस तक यह डिवेलप्ड कंट्रीज की बराबरी में खड़ा हो जायेगा जैसे शब्द लोगों के मुख से निकलना आम बात-सी हो चली है । पर भारत कहां है ? किसी को उसकी याद ही नहीं । वस्तुतः इस देश का नाम भारत भी है यह लोग भूल चुके हैं । विगत काल में बम्बई का मुम्बई, मद्रास का चेन्नई, बंगलौर का बेंगलुरु नामकरण किया जाये जैसी मांगें देश के विभिन्न कोनों से उठी हैं और मानी गयी हैं, लेकिन इंडिया को भारत कहा जाये कम से कम जब हम अपनी ही बोली में बात कर रहे हों ऐसा कोई नहीं कहता है । यही है शुरुआत भारत को भूलने की । देखें आगे हम कहां पहुचते हैं ।
गांधीजी प्रार्थनाओं में विश्वास करते थे । आत्म-शुद्धि के लिए अपनाया जाने वाला यह उनका साधन था । मैं भी प्रार्थना करता हूं: ‘मे मनः शिवसंकल्पमस्तु’ । नहीं, ‘नः मनांसि शिवसंकल्पानि सन्तु’ । आमीन । – योगेन्द्र