आज भी प्रभावी मैकॉले की ब्रिटिश शिक्षा नीति: “We must do our best to form a class … “

अपने देश, इंडिया दैट इज भारत, (and ironically India is actually not Bharat) की भेदभावपूर्ण तथा दोहरी शिक्षा व्यवस्था, लोगों का अंग्रेजी के प्रति निरंतर बढ़ता मोह, समय के साथ पश्चिम के प्रति तीव्रतर होते आकर्षण, इत्यादि के मूल कारण के तौर पर मैकॉले की शिक्षा नीति का उल्लेख किया जाता है । क्या थी मैकॉले की वह नीति? उसके विस्तृत विवरण से में परिचित नहीं हूं । देश में कहीं संबंधित दस्तावेज देखने के लिए उपलब्ध हैं भी क्या यह मुझे नहीं मालूम । इस देश में ब्रिटिश शासन के पक्ष में कैसी शिक्षा नीति अपनाई जानी चाहिए इस बारे में मैकॉले के निम्नांकित उद्गार, वर्षों पहले एक पुस्तक में मुझे देखने को मिले थेः

“WE MUST DO OUR BEST TO FORM A CLASS WHO MAY BE INTERPRETERS BETWEEN US AND THE MILLIONS WHOM WE GOVERN; A CLASS OF PERSONS INDIAN IN BLOOD AND COLOUR, BUT ENGLISH IN TASTE, IN OPINIONS, WORDS, AND INTELLECT.” — T.B. Macaulay, in support of his education policy as presented in 1835 to the then Governor-General, Willium Bentick. (हमारे तथा जिन पर हमारा शासन है ऐसे लाखों-करोड़ों जनों के बीच दूभाषिए का कार्य करने में समर्थ एक वर्ग तैयार करने के लिए हमें भरपूर कोशिश करनी है; उन लोगों का वर्ग जो खून एवं रंग/वर्ण में भारतीय हों, लेकिन रुचियों, धारणाओं, शब्दों एवं बुद्धि/विद्वत्ता में अंग्रेज हों । – टी.बी. मैकॉले, तत्कालीन गवर्नर-जनरल विलियम बेंटिक को 1835 में सौंपी गई अपनी शिक्षा नीति के समर्थन में ।)

एतत्संबंधित किंचित् अतिरिक्त जानकारी मैंने अन्यत्र प्रस्तुत की है । (यहां क्लिक करें) – योगेन्द्र जोशी

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