धोनी की शादी और समाचार चैनलों का दिमागी दिवालियापन

अपना देश इंडिया दैट इज भारत (Constitution says so, which in reality is not true) एक विचित्र, विलक्षण, विसंगतियों से परिपूर्ण, विरोधाभासों के भरा, विविधताओं का धनी देश है । इसकी सबसे बड़ी खूबी है यहां के तथाकथित बुद्धिजीवियों का दिमागी दिवालियापन ।

मुझे इस बात का एहसास तो पग-पग पर होता रहता है, किंतु आज जब सुबह से लगातार क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धोनी की शादी की कमेंट्री हिंदी टीवी समाचार चैनलों पर देखने को मिलने लगी तो लगा कि मैं पागल हो जाऊंगा । जब भी टीवी ‘ऑन’ किया यह देखने के लिए कि देश-परदेश में कहां क्या कुछ हो रहा है, तो देखता हूं कि वही ‘धोनी’ छाया हुआ है ।

क्या कुछ और दिखाने का विचार इन चैनलों को नहीं आता है ? अपने आपको लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पेश करने वाले चैनलों को कुछ और सूझ ही नहीं पाता है ? क्या रोजमर्रा क्रिकेट, और आज के दिन धोनी, के सामने कुछ अन्य बातें माने ही नहीं रखतीं ? क्या धोनी की शादी इतनी अहमियत रखती है कि कोई भी और समाचार भुला दिया जाए ? आखिर ये टीवी चैनल समाचार चैनल हैं कि नौटंकी चैनल ?

इन चैनलों के कर्ता-धर्ताओं को मैं दिमागी दिवालियेपन का शिकार समझता हूं । सोचिए जब देश के समाचार चैनलों का यह हाल हो तो देश के क्या हाल होंगे । वे लोग क्या सोच लेकर देश को आगे बढ़ाएंगे । मुझे क्रिकेट और धोनी से शिकायत नहीं है । उनके प्रति समर्पित 24-आवर न्यूज चैनल दशियों की संख्या में कार्य करें तो कोई बात नहीं । लेकिन न्यूज चैनल को तो न्यूज चैनल ही होना चाहिए न ? हर समाचार के महत्त्व का समुचित आकलन होना चाहिए न ? धोनी की शादी उसका व्यक्तिगत मामला है । दरअसल खुद धोनी को ही इसे सार्वजनिक घटना के तौर पर नहीं पेश करने देना चाहिए । लेकिन लगता है कि जब सबकी आंखें किसी विशिष्ट जन पर टिकती हैं तो उसे जमीन के ऊपर, औरों से कहीं ऊपर, होने का स्वर्गीय सुख मिलता है । यही तो सबकी चाहत होती है !अन्यथा यह कोई कुंभ मेला तो है नहीं, न ही फुटबाल विश्वकप, न महंगाई के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन, न सुनामी की तरह की कोई दुर्घटना । फिर क्यों सब टीवी कैमरे एक ही जगह फोकस हैं ? मेरी तो समझ से परे है ।

समाचार के नाम पर नौटंकी प्रस्तुत करने पर पता नहीं मेरी तरह किसी और को भी पीड़ा होती है कि नहीं । लगता है कि मैं ही पागल हूं कि ऐसा सोचता हूं ।

अभी तक तो मैं सुनता था कि लोग क्रिकेटरों, फिल्मी हस्तियों तथा राजनेताओं के नाम पर दीवानगी में मंदिर बना डालते हैं । लेकिन वे लोग वैयक्तिक स्तर पर ऐसा करते हैं; वे अपने चहेते हीरो के शाब्दिक अर्थ में चरण भी चूम लें तो आश्चर्य नहीं । लेकिन समाचार चैनलों की पूरी की पूरी टीम कुछ वैसा ही करे और करोड़ों लोगों के सामने उसे परोसे तो तकलीफ होने लगती है ।

दिमागी दिवालियेपन के रोग से ग्रस्त देश कभी भी भुखमरी, कुपोषण, गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, सामाजिक भेदभाव, जैसी समस्याओं से मुक्त नहीं हो सकता है । देश 8-10 फीसदी आर्थिक विकास भले ही दर्ज कर ले, लेकिन उससे वास्तविकता नहीं बदल सकती है और न ही लोगों की सोच । ऐसा लोकतंत्र जिसमें नागरिक अपनी समझ रखना ही न सीख सके हों सफल नहीं कहा जा सकता है । – योगेन्द्र जोशी

धोनी की शादी और समाचार चैनलों का दिमागी दिवालियापन” पर एक विचार

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s