‘द गिविंग प्लेज्’ (दान का संकल्प): अमेरिकी अरबपतियों का लोकोपकार संकल्प – समाचार

आज ही अंतरजाल पर एक समाचार पढ़ने को मिला है । खबर है कि बीते दिनों 40 अमेरिकी अरबपतियों ने लोकोपकार संकल्प (The Giving Pledge) लिया है । इसका विवरण मुझे बीबीसी (हिंदी) के जालस्थल पर पढ़ने को मिला (देखें http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2010/08/100804_charity_billionaires_va.shtml) । आप अंग्रेजी में ‘कैलगरी हेरल्ड’ (http://www.calgaryherald.com/life/billionaires+pledge+half+their+wealth+charity/3361311/story.html) तथा अन्य वार्तापत्रों पर भी न्यूज पढ़ सकते हैं । संवाददाता संस्था ‘रॉयटर’ ने अपने वेबस्थल पर उन 40 अरबपति महानुभावों की सूची भी जारी की है, जिन्होंने अपनी संपदा का आधा या उससे भी अधिक लोकोपकार (philanthropy) हेतु दान देने का संकल्प लिया है । (देखिए http://uk.reuters.com/article/idUKTRE6735LH20100804)

बताया गया है कि ये अभियान अमेरिका के शीर्षस्थ अरबपतियों बिल गेट्स (पत्नी मिलिंडा शामिल) एवं वारेन बफेट ने करीब 6 सप्ताह पहले आंरभ किया था । अभी तक 40 शीर्षस्थ अरबपति अभियान में शामिल हो चुके हैं, और अन्य रईस भी आगे बढ़ेंगे यह आशा की जाती है । यह अभियान विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है और किसी पर इसमें भाग लेने का दबाव नहीं हैं, और न ही कोई कानूनी बाध्यता कहीं है । लोग जुड़ रहे हैं ।

और चलते-चलते समाचार संस्था ‘PRO-BONO’ की साइट पर यह भी पढ़ने को मिला:
“… But according to Australian philanthropist, Daniel Petre the chances of an Australian Giving Pledge taking off are zero.
Petre says the “Giving Pledge” must make Australia’s most wealthy feel pretty embarrassed…” (http://www.probonoaustralia.com.au/news/2010/08/forty-us-families-take-giving-pledge)यानी खबर आस्ट्रेलिया के रईसों को उलझन में डाल सकती है; उन्हें दान देना पसंद नहीं, लेकिन अमेरिका में ऐसा हो रहा हो और उनके सामने भी ऐसा प्रस्ताव आ पड़े तो पशोपेश के हालात तो बनेंगे ही न । मतलब यह है कि आपके पास धन-दौलत हो, और काफी हो, तो भी आप लोकोपकार हेतु दान देना चाहेंगे यह आवश्यक नहीं है । उसके लिए दिल और संवेदना, दोनों, चाहिए ।

अपने देश के ही हाल देख लीजिए: हम अमेरिका को घोर भौतिकवादी कहते हुए नहीं अघाते हैं, लेकिन खुद चारों तरफ से एक-एक पैसा बटोरने में लगे रहते हैं । सही-गलत सभी रास्ते दौलत बटोरने के लिए जायज मानते हैं । दूसरे से छीनकर हो या घूस-कमिशन हो या सरकारी खजाने से ‘चोरी’, सब तरफ से अपने पास आना चाहिए । हमको एक धेला भी टैक्स न देना पड़े तो हम खुशी से बल्लियों उछल पड़ेंगे ।

कॉमन-वेल्थ गेम्ज का ही हाल देख लीजिए । उसे भी लोग छोड़े नहीं हैं । बात देश की प्रतिष्ठा की करेंगे, लेकिन येनकेन प्रकारेण उसका पैसा भी अपनी झोली में डालने में किसी को शर्म नहीं आई । लगता तो यही है । हकीकत शायद ऊपर वाले को भी न मालूम हो ।

क्या कभी अपने देशवासियों को भी सन्मति आएगी, न सही दान, कम से कम नाजायज कमाई तो न करें ?योगेन्द्र जोशी

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s