वर्ष 2011 की भविष्यवाणी – राशिनाम को लेकर की गयी बेतुकी कवायद

बात 2011 के वर्षफल की

ज्योतिष् एक विवादास्पद विषय माना जाता है । दुनिया में बहुत-से लोग ज्योतिषीय भविष्यवाणी में विश्वास करते हैं । अपने देश में आस्थावानों की संख्या अपेक्षया अधिक ही है । यहां तो बहुत से सामाजिक एवं धार्मिक कृत्य ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार करने की ही परंपरा रही है । ऐसे बहुत ही कम लोग मिलेंगे जो ज्योतिष् पर आधारित भविष्यवाणियों को सिरे से नकार दें । लोगों में व्याप्त विश्वास के कारण ही देश के समाचार माध्यमों पर ज्योतिष् संबंधी बातों की भरमार देखने को मिलती है । अब चंद घंटों के भीतर नये कलेंडर वर्ष का आगमन होने जा रहा है । यह उपयुक्त काल है जब टेलीविजन चैनल, पत्र-पत्रिकाएं एवं समाचारपत्र अपने पृष्ठों में नये वर्ष की संभावनाओं की भविष्यवाणियां भी शामिल करें – भविष्यवाणियां जो कहीं व्यक्तियों से संबंध रखती हैं तो कहीं व्यापक सामाजिक एवं राष्ट्रीय संदर्भ में कही जाती हैं । किसकी क्या सफलता/असफलता रहेगी, राजनैतिक गतिविधियां क्या रहेंगी, प्राकृतिक आपदाएं कितनी विकट होंगी, आदि की बातें । वह सब कितना सच सिद्ध होगा और कितना झूठ यह तो समय बीतने पर ही स्पष्ट हो पाएगा, किंतु कुछ बातें तो जाहिरा तौर पर ही बेतुकी नजर आती है । मैं भविष्यवाणियों के ऐसे ही एक वाकये की बात करने जा रहा हूं ।

मेरे हिंदी दैनिक समाचारपत्र के साथ एक साप्ताहिक परिशिष्ट भी नियमतः आया करता है । आज के अंक के साथ जो परिशिष्ट मिला है वह वर्ष 2011 के लिए ज्योतिषीय भविष्यवाणी को समर्पित है । इसमें बारहों राशियों से संबंधित लोगों के भविष्य की प्रमुख दशा-दिशा की बातें कही गयी हैं । प्रत्येक राशि के लोगों के बारे में अगले वर्ष की संभावनाओं की चर्चा के साथ ही देश केे स्तर पर ख्यात एक-एक हस्ती के बारे में भी दो-चार शब्द कहे गये हैं । जैसा सोचा जा सकता है हमारे देश में सर्वाधिक महत्त्व फिल्मी हस्तियों की दिया जाता है, और उसी के अनुरूप उक्त परिशिष्ट में 12 में से 10 फिल्मी दुनिया से ही चुनी गयी हैं, तकरीबन सभी तारिकाएं, जिनमें से एक मुस्लिम समुदाय की है । इनके अतिरिक्त मात्र एक महिला खेल-कूद की दुनिया से है – बैडमिंटन के क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर की मौजूदा नामी खिलाड़ी । और दूसरी अपने देश की शीर्षस्थ यानी नंबर एक दलित राजनेत्री (बोलचाल में राजनेता) ।

राशिनाम

जिन भविष्यवाणियों पर मैं टिप्पणी कर रहा हूं वह पूरी तरह राशिनामों पर आधारित है । मतलब यह है कि आपकी राशि क्या है यह आपके नाम के प्रथम अक्षर पर निर्भर करता है । जैसे चू, चे चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ में से किसी एक से आरंभ होने वाले नाम वाले व्यक्ति की राशि मेष होगी । क्या इसका मतलब यह है कि नाम से किसी की राशि निर्धारित होती है ? जी नहीं, नाम से राशि निर्धारित नहीं होती है, बल्कि राशि के अनुसार नाम चुना जाना चाहिए यह ज्योतिषीय परंपरा है । ज्योतिषियों का सुझाव रहता है कि व्यक्ति (तकनीकी भाषा में जातक) का नाम उसकी राशि को ध्यान में रखकर चुना जाना चाहिए, और यह राशि वस्तुतः चंद्र-राशि होती है । चंद्र-राशि वह राशि है जिसमें चंद्रमा उस काल में स्थित होता है जब ‘जातक’ जन्म लेता है । सुविधा एवं व्यक्ति की राशि का त्वरित ज्ञान हो सके इस प्रयोजन से ज्योतिषियों ने वर्णमाला के विभिन्न अक्षरों (समुचित स्वर-मात्रा के साथ) को इन राशियों से संबद्ध किया गया है । साफ जाहिर है कि जातक के जन्म का सही-सही समय का हिसाब रखा जाना चाहिए और राशि की गणना करते हुए जातक का नामकरण किया जाना चाहिए ।

परंतु नामकरण की यह व्यवस्था व्यापक नहीं है । मेरा अनुमान है कि यह परंपरा ब्राह्मणों तक सीमित है और वह भी शायद सर्वत्र नहीं । मेरी जानकारी के अनुसार पूर्वांचल में राशिनाम का उल्लेख केवल जन्मकुंडली में रहता है, और व्यक्ति को संबोधित करने के लिए कोई ‘अच्छा-सा’ वैकल्पिक नाम चुना जाता है । मैंनं इस आम धारणा के बारे में भी सुना है कि राशिनाम से किसी को संबोधित करने से उसकी उम्र घटती है । वस्तुतः बच्चों का नामकरण बिरले लोग ही राशि को ध्यान में रखकर करते हैं । भले ही राशिनाम क्या होना चाहिए यह लोग जानते हों, लेकिन वे अपनी पसंद से नाम ही चुनते हैं । इसलिए जब आप व्यक्तियों के नाम सुनकर ही राशि की बात करते हैं तो ज्योतिषीय विसंगति के साथ आगे बढ़ रहे होते हैं । पहले यह निश्चित कर लेना आवश्यक है कि प्रश्नगत कोई नाम राशि पर आधारित है भी कि नहीं । उक्त मौलिक सिद्धांत पर ध्यान दिए बिना ही नाम के आधार पर भविष्यवाणी करना लोगों को मूर्ख बनाने से अधिक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है

मेरे विचार में शायद ही किसी फिल्मी हस्ती का नाम उसकी राशि से संबंधित हो । वे सब आवश्यकतानुसार आकर्षक नाम चुनने से नहीं हिचकते हैं । मैंने कहा कि ज्योतिषीय चर्चा में एक मुस्लिम महिला भी शामिल की गयी है । मुझे पूरा विश्वास है कि उसका नाम राशि पर विचार के साथ नहीं रखा गया होगा । मेरी जानकारी में मुस्लिम समाज में हिंदू ज्योतिष् की मान्यता नहीं है । यह भी मैंने कहा है कि एक दलित राजनेत्री के बारे में भी कुछ बातें कही गयी हैं । क्या जन्म के समय उस राजनेता के तब के ‘गरीब’ माता-पिता ने पंडितजी से सलाह करके उसका नाम रखा होगा ? दलित और वह भी गरीब, भला कौन पंडित मुंह लगाएगा ? उसके राशिनाम पर भी मुझे शंका है । असल बात तो यह है कि आजकल लोग शब्दकोश में खोज-खोज कर नितांत नये-नये लुभावन नाम अपने बच्चों के लिए चुनने लगे हैं । गौर करें तो कई बार अ से आरंभ होने वाले नामों की भरमार देखने को मिलती है । किसी-किसी दौर में तो कुछ नाम अत्यधिक लोकप्रिय हो जाते हैं और उस दौर के लोगों में वह नाम आम दिखाई देता है । मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि बहुत कम ऐसे नाम सुनने में आयेंगे जो ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हों ।

सौर मास आधारित राशि

ऐसी स्थिति में नाम पर आधारित भविष्यवाणी का अर्थ ही क्या रह जाता है ? चलते-चलते एक बात और । पाश्चात्य ज्योतिष् में सूर्य पर आधारित राशि का प्रचलन है । अर्थात् व्यक्ति के जन्म के समय सूर्य जिस राशि में हो वही व्यक्ति की राशि कहलाती है । पाश्चात्य ज्योतिष् में एक कलेंडर माह के 27-28 तारीख के आसपास सूर्य नयी राशि में प्रवेश करता है और तीसएक दिन उस राशि में रहता है । इस काल में जन्मे सभी लोग एक ही राशि में माने जाते हैं और उनके लिए कमोबेश एक ही वर्षफल मान्य रहता है । किंतु इसी बीच चंद्रमा बारहों राशियों का चक्रमण कर चुका होता है और भारतीय ज्योतिष् के अनुसार बारह प्रकार की भविष्यवाणियां उन लोगों के लिए क्रमशः बताई जाती हैं । है न विसंगति ? कौन-सी पद्धति वस्तुतः सही है । इतना ही नहीं भारतीय ज्योतिष् में सूर्य एक राशि से दूसरे में संक्रमण कलेंडर माह के करीब 14-15 तारीख के आसपास करता है, जैसे 14-15 जनवरी में वह मकर राशि में प्रवेश करता है (माघ मास) । तदनुसार दो महीनों की उक्त तारीखों के बीच जन्मे व्यक्तियों की ‘सौर-राशि’ एक रहती है, जो पाश्चात्य पद्धति से मेल नहीं खाती । फिर सही क्या है ?

मीडिया में वर्णित ज्योतिषीय बातें सार्थक होती हैं यह बात संदेहास्पद है, किंतु वे मनोरंजन का अच्छा मसाला जरूर बनाते हैं । लोग विश्वास न भी करें तो भी चाव से ऐसी बातें पढ़ते हैं, और एकबारगी उसे सच मानकर प्रमुदित भी हो लेते हैं, एक प्रकार की तसल्ली पा लेते हैं । परंतु गंभीरता से इन बातों को लेने का कोई तुक नहीं बनता । पाठकवृंद इस बात के लिए क्षमा करें कि मैं इन्हें ऊटपटांग बातें मानता हूं । – योगेन्द्र जोशी

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