‘नोबेल शांति पुरस्कार 2010’ – अब इंटरनेट की बारी ?! …

इंटरनेट का जाल व्यापक हो चला है और दुनिया के अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ने लगे है, अपनी-अपनी रुचियों और आवश्यकताओं के अनुसार । मेरे लिए यह एक तरफ विविध जानकारियों, जिन्हें मैं अपने लिए उपयोगी पाता हूं, को बटोरने का एक सुविधाजनक माध्यम है, तो दूसरी तरफ यह अपने निजी विचारों तथा उनसे संबंधित श्रव्य/दृश्य सूचनाओं को अन्य लोगों के सामने रखने का सरलतम साधन है ।

निःसंदेह इंटरनेट एक उपयोगी व्यवस्था है, और इसी तथ्य को केंद्र में रखते हुए कुछ उत्साही इंटरनेट-उपभोक्ताओं ने आगामी नोबेल शांति पुरस्कार (2010) के लिए इस व्यवस्था को नामित कर डाला है । उन्होंने इसके पक्ष में जनमत बनाने हेतु इसी इंटरनेट पर अपील जारी कर रखी है । यह समाचार मुझे पहले-पहल दो-तीन दिन पूर्व अपने समाचार पत्र से मिला था । जिज्ञासावश अधिक जानकारी के लिए इसी इंटरनेट का सहारा लेने पर पता चला कि समाचार कई स्रोतों पर उपलब्ध है (उदाहरणार्थ देखें http://www.mynews.in/News/Nobel_Peace_Prize_2010_nomination_for_’Internet’_N37095.html)
जानकारी में यह भी आया कि इस दिशा में उठाए गये कदम के पीछे इटली की wired.com कंपनी की खासी भूमिका रही है । ( wired.com प्रौद्योगिकी से संबंधित दैनिक समाचारों की वेबसाइट है और wired नाम की मासिक प्रत्रिका से संबद्ध है ।) उत्साही लोगों ने अपने उद्येश्य की पूर्ति हेतु एक वेबसाइट भी आरंभ कर दी, जिस पर इंटरनेट को शांति पुरस्कार दिया जाये इस आशय की अपील है । (देखें http://www.internetforpeace.org/manifesto.cfm) उक्त अपील मूलतः अंग्रेजी में है, किंतु विश्व की कई प्रमुख भाषाओं में उसके ‘अनुवाद’ की व्यवस्था भी साइट पर उपलब्ध है । मुझे लगता है कि यह अनुवाद गूगल (google) के तत्संबंधित सॉफ्टवेयर पर आधारित है । यह सॉफ्टवेयर अभी अर्थपूर्ण अनुवाद में सफल नहीं दिखता है, अतः उपलब्ध अनुवाद मुझे ऊटपटांग ही लगता है । अपील के आरंभिक शब्दों पर नजर डालें:-

“अंत में, हम सब समझ में आ गया है कि इंटरनेट केवल कंप्यूटर नेटवर्क पर एक दूसरे के साथ interlocked लोगों की एक अंतहीन शृंखला नहीं है । पुरुषों और महिलाओं, सभी अक्षांश पर, आपस में जुड़ा के लिए कर रहे हैं सबसे बड़ा मंच के नाते और संबंध मानव जाति माना जाता है के प्लेटफार्म में । …”
जब कि अंगरेजी मूल इस प्रकार हैः-
“We have finally realized that the Internet is much more than a network of computers. It is an endless web of people. Men and women from every corner of the globe are connecting to one another, thanks to the biggest social interface ever known to humanity. …”

खैर यह सब है इंटरनेट के शांति पुरस्कार के लिए नामित किए जाने की खबर । असली सवाल जो उठाया जा सकता है वह है कि क्या इस प्रकार का विचार स्वयं में सम्माननीय, उत्तम अथवा सार्थक माना जा सकता है ? क्या इंटरनेट को पुरस्कार के लिए नामित किया जाना चाहिए ? मैं अपना मत व्यक्त कर रहा हूं:-

नोबेल शांति पुरस्कार अभी उन लोगों या संस्थाओं को दिए जाते रहे हैं जो मानव समाज की विभिन्न समस्याओं के समाधान में कार्यरत रहे हैं । किसी व्यक्ति या संस्था के योगदान के सही-सही मूल्यांकन में स्वयं नोबेल कमेटी सदैव सफल रही हो ऐसा नहीं है; यथा विगत वर्ष का पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को दिया जाना विवादास्पद माना गया है । विवादास्पद इसलिए कि मानव जाति की तमाम समस्याओं के प्रति उन्होंने चिंता जताई थी और उनको हल करने के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता की बातें वे करते रहे । लेकिन व्यवहार में बहुत कुछ सार्थक उन्होंने कर दिखाया हो ऐसा नहीं था । उनकी बातों को ही नोबेल समिति ने पर्याप्त समझा, जो कदाचित् एक भूल थी । वस्तुस्थिति का आकलन कुछ अवसरों पर भले ही त्रुटिपूर्ण रहा हो, एक संस्था की दृष्टि से संस्था के ध्येय अच्छे ही रहे हैं । जो व्यक्ति/संस्था मानव हित में घोषित तौर पर कार्यरत हो वही इस पुरस्कार का दावेदार हो सकता है यह तो नोबेल समिति भी मानती ही है ।

लेकिन क्या इंटरनेट वाकई में उक्त प्रकार की संस्था मानी जा सकती है । उत्तर है नहीं । यह तो एक व्यवस्था भर है सूचना के आदान-प्रदान की, सूचना के एक स्थान से दूसरे स्थान तक त्वरित गति से भेजने की, ज्ञान के भंडारण तथा वितरण के लिए बनी । इस व्यवस्था को जो जिस प्रकार से उपयोग में लेना चाहे ले सकता है । स्वयं इंटरनेट के कोई नियम नहीं हैं । वह खुली छूट देता है । समझदार लोग ‘सार सार गहि रहै, थोथा देय उड़ाय’ के मंत्र के अनुसार उसका उपयोग करते हैं । लेकिन इंटरनेट पर समाज के हित वाली बातें ही उपलब्ध हैं, मानव हित के लिए ही उसका प्रयोग होता है, ऐसा कहना सही नहीं है । इंटरनेट तो एक खुला मंच है, जहां गाली-गलौज भी हैं और सूक्तियां भी । इसमें उत्कृष्ट साहित्य और अश्लील साहित्य (पॉर्नोग्रफी) एक साथ मिलेंगे । इंटरनेट का प्रयोग शांति तथा भाईचारा का संदेश फैलाने के लिए भी होता है और नफरत फैलाने के लिए भी । वस्तुतः इंटरनेट व्यवस्था अंकीय – डिजिटल – सूचना के ग्लोबलाइजेशन का एक साधन भर है, और यह अपने उपयोग या दुरुपयोग के बारे में मूक है । तब इंटरनेट को पुरस्कार हेतु नामित करना माने रखता है क्या ?

आज इंटरनेट को नामित करने की बात की जा रही है । कल यही बात वैश्विक टेलीफोन व्यवस्था के लिए भी की जा सकती है । परसों टेलीविजन व्यवस्था के लिए भी बात की जा सकती । फिर यही बात ग्रंथालयों एवं संग्रहालयों के बारे में भी कही जा सकती है, क्योंकि वे ज्ञान के भंडार हैं और समाज के लिए ज्ञानार्जन का स्रोत हैं । फिर तो तरह-तरह की संस्थाओं के लिए भी पुरस्कार की बात कही जा सकती है । परंतु ध्यान रहे कि मात्र उपयोगी संस्था होना पर्याप्त नहीं है; संस्था का एक स्पष्ट ध्येय होना चाहिए । इंटरनेट जैसे खुले मंच के मामले में बहुत कुछ संदेहास्पद है ।

तो क्या कथित नामांकन स्वीकार्य है ? मैं इंटरनेट का उपयोक्ता अवश्य हूं, किंतु इसे नोबेल पुरस्कार के लिए इसे योग्य नहीं मानता । आप क्या मानते हैं यह आप जाने । – योगेन्द्र जोशी