भारतीय राजनीति में माफी मांगने का नाटक

मौजूदा भारतीय राजनीति में सब कुछ जायज है और सब कुछ क्षम्य । आप चौराहे पर जाकर किसी को झूठे ही बदनाम कर आएं और फिर उस व्यक्ति से माफी मांग लें तो आपका अपराध माफ । ऐसा लगता है कि माफी मांगने से किया गया अपराध ‘न किया हुआ’ हो जाता है । माफी के रास्ते बदनाम करने का काम भी आप कर लेते हैं और साथ में बिना किसी घाटे के छूट भी जाते हैं । यह सब ऐसा ही है जैसे कि आप पापकर्म भी करिए और गंगास्नान करके उस पाप से मुक्त भी हो जाइए । वाह क्या नाटकबाजी है, निहायत बेशर्मी के साथ ।

मैं राजनेताओं के माफी मांगने को एक मजाक से अधिक कुछ नहीं समझता । मुझे उस व्यक्ति पर तरस आता है जिसके विरुद्ध कुछ कहा जाता है और माफी मांगे जाने पर संतुष्ट हो जाता है । ऐसा करना यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति भी कही गई बातों को गंभीरता से नहीं लेता है । लगता है कि माफी मांगे जाने से उसके अहंभाव को तसल्ली हो जाती है, जिसके आगे उसे कुछ नहीं चाहिए ।

मैं मानता हूं कि माफी मांगने और माफी पा जाने की जो परंपरा हाल में चली है उसने राजनेताओं में यह भावना भर दी है कि ऊलजलूल, निरंर्थक, अप्रासंगिक, बकबास कर लो और फिर जरूरत पडने पर माफी भी मांग लो । उनका उल्टासीधा बोलना भी हो जाए और बदले में उनके किरुद्ध कुछ काररवाई भी न होने पाये । अगर मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा होता तो राजनीति में लोग अपनी जबान पर लगाम लगाने को मजबूर होते । लेकिन ऐसा होता नहीं ।

मेरा मत है कि किसी का माफी मांगना तभी कोई अर्थ रखता है जब उसे इस बात का अहसास हो कि उसने वाकई गलत कार्य किया है, जब उसे अपने किए पर आत्मग्लानि हो, जब उसे घटना पर शर्मिदंगी अनुभव हो, जब उसके मन मैं यह संकल्पभाव जगे कि उसके हाथों ऐसा अनुचित कर्म फिर न होने पाए । ऐसा व्यक्ति ही क्षमा का हकदार होता है । धर्मशास्त्रों के अनुसार ऐसा व्यक्ति ही पापमुक्त होता है । लेकिन हमारी राजनीति में माफी मांगने वाले के चेहरे पर आत्मग्लानि के भाव नहीं दिखते । वह कुछ इस अंदाज में माफी मांगता है कि जैसे कहना चाहता हो, “तू कह रहा है न, चल माफी मांग लेता हूं । तुझे भी तसल्ली हो जाएगी । मेरे बाप क्या जाता है !”

ऐसे में माफी मांगना महज एक रस्मअदायगी बन के रह जाती है । व्यक्ति के मन में जो दुर्भावना रहती है और उसके आचरण में जो दुर्जनता छिपी होती है वह ऐसी माफी के बाद भी यथावत बनी रहती हैं ।

क्षमायाचना का आत्मग्लानि के भाव से गहन संबंध है इस तथ्य को राजनेता नहीं तो कम से कम आम आदमी तो समझे । – योगेन्द्र जोशी