पानी से इंजन चलेंगे; पाकिस्तानी इंजीनियर का चमत्कार, या झूठा दावा?

[Hindi version of 30 July  post in English]

पिछली 28 तारीख के समाचारपत्र में मुझे दिलचस्प एवं अविश्वसनीय खबर पढने को मिली । एक पाकिस्तानी इंजीनियर, वकार अहमद, ने अनेकों लोगों के सामने पानी से चलने वाला इंजन दिखाया ।

मेरी जिज्ञासा जगी और इंटरनेट से अधिक जानकारी जुटाने का विचार बना । मुझे समाचार से जुड़े ये वेब-पृष्ट मिले:

timesofindia.indiatimes.com

cssforum.com.pk

godlikeproductions.com

pesn.com

newsworldwide.wordpress.com

पाक सरकार बहुत खुश है । पानी से चलने वाला इंजन ! बहुत खूब, समझो ऊर्जा की समस्या सुलझ गई अब । पानी की कमी तो है नहीं; फिर क्या, मनुष्यों के खर्चने के लिए ऊर्जा की कमी नहीं रहेगी ! सरकार इंजिनियर को योजना पर आगे बढ़ने में मदद करने वाली है ।

मजे ही मजे ! अब ऊर्जा कोई समस्या नहीं रह जाएगी !!

लेकिन मेरे जैसे भौतिकीविद (फिजिसिस्ट) के लिए यह झूठ के अलावा कुछ नहीं । अंतर्दहन इंजन (internal combustion engine) के लिए पानी बतौर इंधन के ? 100 फीसद असंभव, क्योंकि प्रकृति (भौतिकी) के नियम इसकी इजाजत नहीं देते ।

अज्वलनशील पानी से ऊर्जा पाने की यांत्रिकी या विधि क्या है ? समाचार इस बात को स्पष्ट नहीं करता । मेरी समझ में जो आया वह यह हैः पानी का विद्युत्-अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) करके हाइड्रोजन प्राप्त किया जाएगा, जो पेट्रोल/डीजल के बदले इंधन का कार्य करेगा । ठीक; इसमें कुछ भी गलत नहीं ।

लेकिन यह तो बताया नहीं गया है कि इलेक्ट्रोलिसिस स्वयं में कैसे संपन्न होगा, जिसके लिए बिजली की आवश्यकता अनिवार्य होती है । वह इंजीनियर क्या एक बैटरी का प्रयोग कर रहा है निर्बाध विद्युत्-धारा हेतु, जिससे पानी अपने रासायनिक घटकों, जिसमें हाइड्रोजन (इंधन) एक है, में विघटित हो सके ? इंजन चलाने के लिए आपको हाइड्रोजन की सतत पूर्ति जरूरी है, जिसका मतलब है इलेक्ट्रोलिसिस की सतत प्रक्रिया, और उसके लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति ।

बिजली की यही आपूर्ति ऊर्जा का वास्तविक स्रोत है । मैं पुनः कह रहा हूं समाचार स्पष्ट नहीं करता है कि कथित इंजन के लिए बिजली आपूर्ति कहां से हो रही है ? अगर बिजली आपूर्ति नहीं तो फिर इलेक्ट्रोलिसिस कैसे हो रही है ?

अगर ये बातें सही हैं तो इसका मतलब है कि आप असल में ये कर रहे हैं:

विद्युत् स्रोत (बिजली) → रासायनिक ऊर्जा (इलेक्ट्रोलिसिस) → हाइड्रोजन (रासायनिक ऊर्जा स्रोत) → ऊष्मा ऊर्जा (हाइड्रोजन बतौर इंधन) → यांत्रिक ऊर्जा (धूर्णन गति) → वाहन चलाने में प्रयुक्त

विद्युत् ऊर्जा आपूर्ति का खुलासा न करते हुए यदि उक्त युक्ति अपनाई जा रही हो, तब इस सवाल का जवाब मिलना चाहिएः उस बिजली को सीधे विद्युत्-मोटर चलाने में इस्तेमाल क्यों न किया जाए, जिससे मशीन चलाई जाए ?

विद्युत् स्रोत (बिजली) → यांत्रिक ऊर्जा (धूर्णन गति देने वाली मोटर चले) → वाहन चलाने में प्रयुक्त

बैटरी-चालित कारों/बाइकों का यही सिद्धांत है । ऊष्मागतिकी (थर्मोडाइनेमिक्स) का छात्र इसे भली भांति समझ सकता है कि पहली विधि दूसरी से अनिवार्यतः कम दक्ष (इफिसेंट) होगी, क्योंकि ऊर्जा के एक प्रकार से दूसरे में परिवर्तन के प्रत्येक चरण में उसकी अपरिहार्य हानि होती है ।

इस प्रकार बेहद अहम सवाल उठता है कि कैसे पानी बतौर इंधन के कार्य करता है । मैं रासायनिक इंधन की बात कर रहा हूं, नाभिकीय इंधन की नहीं । – योगेन्द्र जोशी

Water to fuel car engine. Pak engineer’s miraculous feat, or hoax?

My Hindi newspaper of 28th had an amusing and amazing story. A Pak engineer, Waqar Ahmad, recently demonstrated his Water-Fuelled engine before a gathering of politicians, government officials, scientists (?) and students, etc.

I got curious and searched the internet for more about the news. I got some links to the said item, which I give here:

timesofindia.indiatimes.com

cssforum.com.pk

godlikeproductions.com

pesn.com

newsworldwide.wordpress.com

The Pak Government is very happy. An engine running on Water as fuel! All energy problems will get solved! Water being available in abundance, humanity shall have unlimited energy to consume. The engineer is now to go ahead with govt. support.

Rejoicing! Hurrah!! Energy problem no more!!!

For a physicist like me, that is a pure HOAX, unfortunately. Water as fuel in place of petrol/diesel in an internal combustion engine? 100 per cent impossible. Why? Simply because the known laws of nature (physics) do not permit that.

What is the mechanism of getting energy out of noncombustible water? The news items does not make things clear. What I could understand is this: water would be subjected to electrolysis to produce hydrogen, which would act as fuel in place of petrol/diesel. That is fine; nothing wrong.

But it is not explained how that electrolysis would be effected. Electrolysis necessarily means use of electricity! Is the engineer using a storage battery to have continuous supply thereof to decompose water into its chemical constituents, one of them being hydrogen to be used as fuel? To run an engine, you would need a continuous supply of hydrogen. And that would demand a continuous process of electrolysis, which in itself implies a continuous supply of electricity.

This electric power supply is the ultimate source of energy. I reiterate that the news does not clarify if an electric supply is being used for the said engine. What else is the mechanism of electrolysis?

If this much is true then what you are actually doing is this:

electric source (electricity) →convert to chemical energy (electrolysis) → hydrogen (source of chemical energy) → convert to heat energy (hydrogen as fuel) → convert to mechanical energy (rotational motion produced) → use

this to drive a vehicle etc.

Now if this is the trick being followed, without disclosing the hidden use of an electric power supply, then a question deserves to be answered: Why not use that electricity to run an electric motor directly, which would drive the desired machinery.

electric source (electricity) → convert to mechanical energy (drive an electric motor to get rotational motion) → use this to drive a vehicle etc.

This is the principle of battery-driven cars/bikes available in the market.

Any student of thermodynamics can understand well that the first approach would be necessarily less efficient than the second, because at every step of converting one form of energy into another involved unavoidable loss of energy.

So a million dollar question is how water can act as a fuel? (I am talking of chemical fuel and not nuclear fuel!)